कल पटना से एक अधिकारी साहब आए, नया ब्लेजर मेरे दुकान में फँस गया। मैंने अपनी पुरानी तारों से उसे छुड़ाया, पर वो बस इतना पूछते रहे कि "फॉर्म भरा क्या?" बेचारा, उनकी आँखों में वही थकान थी जो मेरे पिता जी की होती थी जब कोई गाड़ी बार-बार ठीक नहीं होती।
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