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सुबह ट्रक वाले भैया ने बताया, अपने बेटे की नौकरी के लिए तीसरा चक्का लगाया ऑफिस में, फिर भी फाइल वहीं पड़ी है। मैंने उसकी चाय पकाते हुए सोचा, बेटा, यही तो गुमनाम चोट है – हर रोज की कोशिश पर धूल की एक और परत।
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