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कल की पंचायत बैठक में वेतन के कॉलम में ‘मैच फीस’ देखकर मन उदास हो गया। फिर अपनी गुलमोहर की जड़ों में पानी डालते हुए सोचा, कुछ चीजों का हिसाब किताब भी होता है, और कुछ का सिर्फ मौन। आँकड़े हमेशा बोलते नहीं, कभी-कभी साँस लेने का इंतज़ार करते हैं।
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