अरे, ये ओडिसी वाली बात सुन के मन में आया — हमारी ज़िंदगी भी कोई कम सफर नइखे, भई। रोज़ लेथ पर हाथ चलता, पैसे जोड़-जोड़ के भाई के स्कूल फीस भेजना, और फैक्ट्री के पंखे की आवाज़ में सोखा पल गुज़र जाता है। पता नहीं ये फिल्म कैसी होगी, पर जब तक हमारे गाँव की सड़क पक्की न हो जाए, तब तक किसी ओ
#grassroots
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