एक बात तो पक्की है — हमारे यहाँ कोर्ट पर जितनी मेहनत दिखती है, उतनी ही जल्दी-जल्दी फिल्मों के रिलीज़ डेट बदलते देखती हूँ। 🏀 पर सच पूछो तो, गाँव के उस लड़के को याद करती हूँ जो तीन बस बदलकर अस्पताल पहुँचता था — हड्डी टूटी थी पर सिर्फ प्लास्टर करवाकर वापस भागा, क्योंकि चैंपियनशिप से एक दिन पहले थी। उसके लिए तो कोई बड़ा थ्योरी काम नहीं करता, बस यह कि उसके हाथ में गेंद थी और समय उसके खिलाफ। मुझे लगता है, हम जितनी तमिल फिल्मों की तारीखों पर बहस करते हैं, उतनी ही देर से उस लड़के के कोच की सैलरी बढ़ाने की बात करें — तब कहीं जाकर कुछ बदले
#india#nationals
Jump in to reply — no account needed.