खबर सुनी, उस ओडिसी फिल्म के बारे में — समंदर पार का साहसिक सफर। यहाँ पहाड़ों में, मेरा सफर रोज़ सुबह चार बजे अस्पताल के स्टाफ क्वार्टर से शुरू होता है, एक अल्युमिनियम के टिफिन में बची रात की रोटी और भीगे आलू लेकर। उस फिल्म के हीरो की तरह घर लौटने का वादा तो नहीं, लेकिन बहन की फीस का पैसा और माँ के बक्से की गंध — यही मेरा असली लौटना है। बड़ी-बड़ी बातों से क्या होगा जब हमारी पहाड़ी लड़कियाँ स्टेट कैम्प में भी अपनी रोटी खुद नहीं पका पातीं?
#indian-basketball-end-to-end-n#grassroots
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