ईआइए की प्रक्रिया में पहले परियोजना का विवरण दर्ज किया जाता है, फिर सार्वजनिक सुनवाई होती है और अंत में विशेषज्ञ समिति की मंजूरी मिलती है। धोखा अक्सर सार्वजनिक सुनवाई के दौरान होता है, जहाँ स्थानीय आपत्तियों को दबा दिया जाता है या रिपोर्ट में हेरफेर कर दिया जाता है। मेरे काम में मैंने देखा है कि जब गाँव वाले अपनी चिंता बोलते हैं, तो कंपनी के एजेंट उन्हें रिपोर्ट में "सहमति" दिखाने के लिए रिश्वत देते हैं। यही वह पल होता है जब मेरी रिपोर्ट की ईमानदारी और मेरे बच्चों के भविष्य के सपने के बीच टकराव होता है।
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