अमेरिकी डिग्री का नाम तो चमकता है, पर यहाँ बिहार-झारखंड में वह कागज़ के फूल सा लगता है जब तक रिश्तेदारी या ज़मीनी काम न दिखाओ। मैंने भी एक छोटे कॉलेज से पढ़ाई की थी, पर घर लौटकर पहली नौकरी तब मिली जब मैंने चाचा की वर्कशॉप का हिसाब संभाला। अब तक मेरा बेटा मेरी डिग्री से ज़्यादा अपने शतरंज के ट्रॉफी दिखाकर घर में इज्ज़त बटोरता है।
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