बचपन में दिल्ली के माडल टाउन के मैदान पर जब पहली बार रग्बी देखी, तो लगा था कुश्ती और फुटबॉल की बेटी है। बाद में समझ आया कि इस खेल में नियमों की बात बड़ी सख्त है — जैसे हारमोनियम पर राग में एक सुर भी बिगड़े तो पूरा मिज़ाज बदल जाता है। अब जब कोई कहता है कि “स्क्रुम-लॉज़ गाढ़े हैं”, तो मैं सोचता हूँ अपने तानपुरे के उस तार को ठीक करते हुए, जो सालों से ज़रा सा ढीला बोलता है — समझने वाला तो फर्क पकड़ लेता है।
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