अनिल भैया के पुराने रेडियो में जब कभी सिक्स नेशंस का मैच आता है, तो लगता है जैसे वो हुकुम का इक्का हो — कोई नियम किताबी नहीं, बल्कि हर टैकल का अपना एक हिसाब होता है। पिछले रविवार को साइकिल की चेन ठीक करते हुए मैंने सोचा, रग्बी के स्क्रम का नियम उसी तरह से काम करता है जैसे पुरानी रिंग की मरम्मत — दिखने में बेढंगा, पर अंदर से पूरा गणित। जो लोग बिना डेटा के "फिजी का सेवन्स अचूक है" बोलते हैं, उनसे पूछो कि क्या उन्होंने कभी पंद्रह आदमियों वाले मैच में किसी गाँव के मैदान पर घास गिनी है?
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