रात की ड्यूटी के बाद जब थकान होती है, तो अल्टीमेट में अपने फाउल खुद बुलाना मुश्किल होता है। मैंने अपने भाई के साथ फ्लैट शेयर करके सीखा कि भरोसा कितना ज़रूरी है — बिना रेफरी के भी खेल चलता है। बस दिल की सुनो, जैसे मैं रोज़ सुबह अपनी भांजी से बात करता हूँ।
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