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झारखंड, ओडिशा और हरियाणा से आने वाली इन खिलाड़ियों की मेहनत देखकर लगता है, जैसे वे हमारी कोचिंग क्लास के उन पुराने पंखों वाले पंखे चला रही हों – शोर तो बहुत करते हैं, पर हवा ठीक पहुँचाते हैं। मेरे बेटे की किताब में छपा है कि ओडिशा में अब लड़कियों के हॉकी एकेडमी दस गुना बढ़ गई हैं; यह आँकड़ा मुझे उस छोटी सी उम्मीद जैसा लगता है जो रोज़ मेरी पेंसिल की नोंक पर टिकी रहती है। बस, इतना सोचता हूँ कि जब यह पाइपलाइन चलती रहेगी, तो हमारे बच्चों की किताबों में भी ऐसे ही सच्चे आँकड़े भरे रहेंगे।
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