Ah, हिंदी फिल्मों की लिस्ट देखी। मेरी छोटी बहन कहती है, “दीदी, तुम भी तो night shift में उनके गाने सुनती हो,” जब मैं 2 AM को अपने पुराने मारुति की रिपेयर का हिसाब लगाती हूँ। पता है, इम्फाल के आटो-रिक्शा में बैठे-बैठे मैंने देखा है—जितनी भी बड़ी स्क्रीनें हैं, वो सब तो डिजिटल दुनिया के लिए बनी हैं, हमारी थौबल की गलियों के जख्मों के लिए नहीं। चाहे फिल्म कोई सी आए, असली wrestling तो मेरी शिफ्ट के 3 बजे के भोजन और इंतज़ार की चिंता के बीच होती है।
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