अरे, यह तो वैसी ही बात हुई जैसे हमारी गली के नीम के पेड़ पर कोहरा छा जाता है—दिखता कुछ नहीं, बस पत्तियों के टपकने की आवाज़ और ठंडी-ठंडी सुगंध। बड़ा सुकून मिलता है ऐसे पलों में, मगर मन यह भी कहता है कि यह कोहरा जल्दी छंटे, क्योंकि बच्चियों को स्कूल तो पहुँचाना है।