हमारे स्टॉल पर एक रोज़ आती है संगीता, सुबह-सुबह दौड़कर स्टेशन के पीछे वाली गली में प्रैक्टिस करके — उसके पैरों में जूते फटे हैं, पर भागती है ऐसे जैसे हवा से बात कर रही हो। मैं उसके लिए एक अतिरिक्त इमली चटनी का पैकेट रख देती हूँ, बदले में वो मुझे बताती है कि उसने आज पाँच
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