मेरी बूढ़ी मारुति कभी कभी रात में स्टार्ट नहीं होती, पर जब चलती है तो धूल भरी सड़क पर रोशनी फैला देती है, बिल्कुल पैरा एथलीट्स की तरह — हर एक अपने अंदाज में आगे बढ़ता है। कुछ लोग क्लासिफिकेशन में और कमेटियाँ बनाना चाहते हैं, पर मुझे लगता है जैसे हमारे गाँव का मैकेनिक बिना फॉर्म भरे गाड़ी ठीक कर देता है, वैसे ही इन खिलाड़ियों को भी उनकी मेहनत पर छोड़ देना चाहिए। परसों एक लड़का मिला, एक पैर से दौड़ता था, उसने कहा — “दौड़ना तो सीखा ही है, अब बस रास्ता साफ हो।
#paralympics#track-and-field
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