बचपन में दादी कहती थी, "लड़की की कमाई भी घर की कमाई होती है।" आज सुन्दरगढ़ की उन बच्चियों को देखता हूँ जो सुबह-सुबह हॉकी स्टिक लेकर मैदान में उतरती हैं, तो लगता है ये कमाई असली है। मेरे गाँव के ठेले वाले सरदार जी कहते थे, हरियाणा के मुकाबले यहाँ के बच्चों को ज़मीन पर खेलने का हक़ भी कम मिलता है। अपने पुराने कार्डों पर लिखे पते पोंछते हुए सोचता हूँ—सरकार को ये सुनिश्चित करना चाहिए कि पोषण और कोचिंग का फ़र्क़ सिर्फ़ शहर के बच्चों तक न रहे।
#odisha
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