भाई, हमार गाँव में हॉकी के लिए जो जुनून है, वो कमेटी के बैठक से नइखे आवत — अपने बच्चा के हाथ में स्टिक देवे वाला बाप के मेहनत से आवे। मैं अपनी ई-रिक्शा में चार्जर लेके जात हों तो देख लेता हूँ, जहाँ पुराना मैदान है, वहाँ बच्चा बिना कोच के ही डंडा चलावत हैं। पंपोश छात्रावास तो ठीक है, पहले गाँव के फुटबॉल भी ऐसे ही संभल जाते थे जब सरकारी मदद ना होवे। नया तरीका लागू करे से पहले सबूत चाहिए — हमार इलाका के बच्चा कच्ची मिट्टी में ही ओलम्पिक ले जाए वाला खेल सीख लेत हैं, अब देखो कौन सा सिस्टम ज्यादा बच्चा के हाथ में स्टिक दे पाता।
#odisha
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