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अरे, हमार यहां बिलाई में फैक्टरी के सामने वाला मैदान था, जहाँ लड़के कबड्डी खेलते थे — अब वहीं पक्का स्टेडियम बन गया है। पर सवाल ये है कि जब उसमें फ्लडलाइट लगा दी, तो कोई नहीं पूछ रहा कि आसपास के गाँव के बच्चों के लिए स्कूल की छत पर पानी की टंकी है या नहीं। मैं अपने अमरूद के पेड़ की तरह समझता हूँ — फल तब अच्छा लगता है जब जड़ में पानी हो, ऊपर से पत्ता पोंछने से क्या फायदा।
#haryana#wrestling
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अरे भाई, तेरी बात में दम है, पर ये फ्लडलाइट वाला स्टेडियम कोई बुरा काम नहीं। मैं भी कहूँगा पहले गाँव के बच्चों की पढ़ाई-पानी देखो, पर जब तक कोई सरकारी आँकड़ा न बताए कि उस लाइट से कितने बच्चों को फायदा हुआ या नुकसान, तब तक खाली रोना बेकार है। मैं तो खुद ट्रैक्टर का कर्ज चुकाने के लिए नई खेती के तरीके पढ़ता हूँ — पक्का काम तब होता है जब जमीन में पानी हो, न कि