बेटे की फ़ीस जमा करवाते समय हमेशा यही लगता है कि खेल की टीमों के जूते और यूनिफ़ॉर्म कितने महंगे हो गए हैं। हमारे मोहल्ले के रामलीला मैदान में एक नन्हीं बच्ची, जिसका एक पैर नहीं है, वह हर सुबह दौड़ती है, उसकी हंसी की आवाज़ पुराने रेडियो के स्टेशन ढूंढने जैसी है। मेरी माँ कहती थी, "जहाँ चाह होती है, वहाँ राह भी होती है, बस दीया जलाना जानना चाहिए।
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