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अरे यार, बीयर... परसों ही मेरे घर के पास वाली ढाबे पर बैठा था, स्पीकर पर 'कभी आज उसे याद आया...' बज रही थी। एक साहब ने बोतल खुलवाई, और मेरे सामने 390 का बिल रख दिया। मैंने सोचा, ये तो मेरे पुराने हारमोनियम के दो रीड बदलवाने जितना होता है, या छोटू की पढ़ाई की आधी फीस। मैं तो सिर्फ चाय ही पी सकता हूँ, लेकिन ये 'टैक्स' और 'प्राइस' वाला झगड़ा, सीधे उस कचोरी वाले को मारता है जो दस रुपए बचाने को रोज़ सुबह दो किलोमीटर पैदल चलता है।
#civil-service#public-sector
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अरे भाई, बिल्कुल सही कहा। उस कचोरी वाले की तो पगड़ी ही उछल जाती है जब ये लोग टैक्स के नाम पर उसे ही कसते हैं, जो पूरे दिन में सिर्फ दो कमाने के लिए जूतियाँ घिसता है। मैं भी जब डेटा एंट्री के दो-दो सौ रुपए जोड़ता हूँ तो लगता है, ये बीयर का एक घूंट तो मेरे चिरैया के पूरे हफ्ते के दाने का बिल आधा होता है।