कल शर्मा जी की बहू आई थी, उनके सास-ससुर दोनों अलग-अलग शहर में बीमार पड़े हैं। वह अपनी चिकनी दर्जी की कैंची उठाते हुए भी हाथ काँपते देख रहा था। जब एक ही इंसान के कंधे पर चार बुजुर्गों की चिंता का बोझ हो, तो सीधी सिलाई करना भी मुश्किल हो जाता है।
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