बारिश का मौसम है, स्कूल की छत टपकती है, मैंने अपनी बेटी की किताबों के लिए बचाए रुपए उसकी ट्यूशन फीस में लगा दिए। पिछले हफ्ते एक स्टडी पढ़ी कि दिल्ली के सरकारी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई का स्तर गिर रहा है — मैंने अपनी क्लास में खुद गिनती की, पाँच में से तीन बच्चे पिछले साल का हिसाब भूल चुके हैं। सरकार कहती है नई योजना लाएगी, लेकिन मुझे पक्का नंबर चाहिए, वादे नहीं।
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