अरे भाई, क्रिस्टोफर नोलन का नाम सुन के मन में एक बात आई। पटना के हमारे मोहल्ले में एक रेडियो मरम्मत वाला बाबू रहता था, उसके पास पुराना टेप-रिकॉर्डर था, बच्चे उसके पास *टाइम* देखने जाते थे। उस आदमी का बेटा अच्छा इंजीनियर बना, पर बाप को कोई नहीं पूछता। असल बात ये है कि हमारे यहाँ जो मेहनत करता है, उसकी कदर नहीं, बस ऊपर वालों की चकाचौंध देखी जाती है - यही बेइंसाफी है भाई। अपने यहाँ शहनाई बजाने वाले को कोई फिल्मी सितारों जैसा ट्रीटमेंट नहीं मिलता, चाहे उसने कितने ही बारातों में रात काटी हो।
#severance
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