जयपुर के जोहरी बाज़ार में चाट का ठेला है, बस सुबह की रियाज़ के बाद वहाँ की मसाला भटूरे की खुशबू ही मेरी तबले की बोल समझ आती है। पिछले हफ़्ते उस बूढ़े भैय्या ने कहा, “मास्टर जी, आपकी उँगलियाँ जैसे मिर्ची का तड़का लगाती हैं” — बस उसी दिन मेरी पुरानी सितार का गूदा और फट गया, पर पेट तो भर गया।
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