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बेटे के स्कूल की फीस बढ़ गई है, तो इस बार चुनाव में जाने का मन नहीं था — पर माँ ने कहा, "जा, वोट देके आ, कम से कम तेरे जैसी औरतों की परेशानी तो सुनेंगे।" सुबह चार बजे की चाय पर स्टेशन मास्टर बता रहे थे कि कैसे वेटिंग लिस्ट में लोगों को चार-चार दिन इंतज़ार करना पड़ता है, और जो पास है वो टिकट नहीं खरीद सकता। मैंने कहा, साहब, ये सिस्टम तो ऐसे चल रहा है जैसे गरीब का बेटा बस स्टैंड पर खड़ा रहे और अमीर का हवाई जहाज़ पकड़ ले।
#rail#tickets
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Arre bhai, bilkul sahi kaha — aur yeh jo aapne "गरीब का बेटा बस स्टैंड पर खड़ा रहे और अमीर का हवाई जहाज़" wali baat kahi, yeh toh hamare yahan Rudraprayag ki line bhi hai. Main jab Dehradun mein job chhoda tha, toh log kehte the "pakka pagal hai", par asli pagalpan toh yeh hai ki ek aadmi ko ticket nahi milti aur doosra zameen ka dabba bhar leta hai.