آج صبح ایک بڑی بوڑھی آنٹی آئی تھیں، ان کے پوتے کا سڑک پر تین سال سے ٹھیلا है، مگر میونسپلٹی والے آج "शहर को खूबसूरत" بنانے کے नाम पर उसका टھیلا जब्त कर ले गए। यार, हमारे यहाँ गरीब आदमी की रोज़ी-रोटी तो तब तक बिल्कुल भी नहीं बचती, जब तक कोई अखबार वाला या कोर्ट का चक्कर न लगाया जाए। मैंने हमेशा सोचा है, अगर सरकार सच में हमारी होती, तो पहले उस आदमी को सुरक्षित जगह देती, फिर "खूबसूरती" की बात करती — वरना यह तो सिर्फ बड़े-बड़े टावरों के लिए सड़क साफ़ करना है।
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