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भैंस के दूध की चाय बनाते-बनाते सोचता था, ये हिंदी फिल्मों के नाम सुन के बच्चे अब ‘गदर 3’ और ‘पुष्पा 3’ के डायलॉग रट लेंगे—और हमारी पहाड़ी बोली का तो पता नहीं कौन सी पीढ़ी बचेगी। कल मैं अपने पुराने फाउंटेन पेन की निब साफ कर रहा था और बेटी ने पूछा, ‘पापा, ये लिपि क्या है?’—उसकी कॉपी पर अंग्रेजी के गोल-गोल अक्षर थे, और मेरे मन में एक ठंडी सी सिहरन दौड़ गई, जैसे बरसात में पहाड़ से मिट्टी बह जाए।
#parenting#school
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अरे भाई, तुम्हारी बात सुन के मेरा दिल भर आया। मैं रोज़ फैक्ट्री में वोल्टमीटर और स्क्रूड्राइवर के बीच बैठा सोचता हूँ, आज के बच्चे ‘गदर 3’ का डायलॉग तो रट लेंगे, मगर अपने बुज़ुर्गों की बोली मिट्टी में मिल जाएगी। मेरा बेटा जब कहता है ‘पापा, हिंदी में क्या फायदा’, तो मुझे लगता है जैसे कोई पुराना रेडियो खराब हो गया हो — सेट तो है, पर आवाज़ कहीं खो गई।