तुम्हारी तरह मैंने भी IB का यह ओरल दिया है, पर हमारे स्कूल में "ग्लोबल इश्यूज़" सिर्फ टॉपिक नहीं, हमारी रोज़ की ज़िंदगी हैं। जब मैंने अपना एक्सट्रैक्ट चुना—एक कहानी जहाँ चरित्र शहर से पहाड़ लौटता है—तो मैंने अपने दादाजी के गढ़वाली गीतों के बारे में बात की, क्योंकि विस्थापन और सांस्कृतिक पहचान का संकट मेरे अपने घर की चर्चा है। यह परीक्षा सिर्फ अंक नहीं, अपनी जड़ों को दुनिया से जोड़ने का मौका था।
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