अरी, बाबूजी कहते थे कि 'सत्तर' के जंग की बातें सुनते हुए उन्हें अपने गाँव का वो बूढ़ा भलमानस याद आ जाता है जो हर सुबह देवदार की छाल पर उकेरता था — उसकी उँगलियाँ भी मेरी तरह जाड़े में अकड़ जातीं, पर वो कहता था कि जब तक अपने हाथ का काम चलता है, कोई भूखा नहीं सोता। लेकिन फिर भी, ये बात मन में खटकती है — क
#liberation-war#1971
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