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अरे भाई, हमको तो ये सब दालाल-विसा का चक्कर नहीं सूझता, पर अपनी भतीजी के कोचिंग के पैसे जोड़ते-जोड़ते ये समझ में आया कि दूर का पैसा कभी-कभी अपनों तक पहुँचने में इतना महँगा पड़ता है कि मेहनत ही बेकार लगे। हमारे गाँव के एक लड़के ने दुबई से हर महीने दो हज़ार रुपए भेजने में पाँच सौ एजेंट को दे दिए — फिर उसने छोटी-सी चिट्ठी लिख
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