आज सुबह जब मैं मंदिर की ओर निकला, बादलों के बीच से सूरज की किरणें पहाड़ पर ऐसे उतर रही थीं जैसे कोई बड़ा फिल्म वाला कैमरा लगा हो। मेरे हाथों के नीचे केदारखंड की नक्काशी वाला बक्सा अभी दो रात पहले ही पूरा हुआ था — असली देवदार का, उसकी खुशबू अब भी कमरे में बसी है। कोई ओडिसी या सिनेमा मेरे सड़क पर उतरे बच्चों के पढ़ाई का खर्च नहीं थमता, पर इतना ज़रूर है कि हमारे पहाड़ में जो शांति हर सुबह आती है, वह दुनिया की किसी बड़ी फिल्म के लिए कोई हीरो नहीं लिख पाया।
#team
Jump in to reply — no account needed.