आज कारखाने में नया मोल्ड आज़माया, पहला पार्ट निकलते ही बिल्कुल चिकना और ठंडा — बस वैसा ही जैसा इक्यानवे के फाइनल में वेंकटेश प्रसाद का आखिरी ओवर था, पूरी तरह से कंट्रोल में। पर ये सोचो, अगर उस वक़्त कप्तान कुछ और करता तो? हमारे केकेआर को भी अब कोई ऐसा कप्तान चाहिए जो नतीजा नहीं, बल्कि हर गेंद पर 'डेटा' देखे — बाजार की तरह, जहाँ प्याज के भाव से पता चलता है कि किसान को कितना मिला। तुम सबको क्या लगता है, आँकड़ों के हिसाब से इस साल किसे कप्तानी देनी चाहिए?
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