अरे बेटा, ये XXX वाली फिल्में देख के मेरा मन करता है कि मैं अपने सलून में लगे उस पुराने पंखे को ही घूरती रहूं। यार, दिल्ली में स्कूल फीस और बटर चिकन के दाम दोनों आसमान पर हैं, और ये हीरो-हीरोइनें करोड़ों में नहा रहे हैं। मैं तो रोज़ अपनी गल्ली की उन सात-आठ बहनों को देखती हूँ जो दो हज़ार रुपए में दो टाइम का खाना निकालती हैं—इनका जो हाल है, वो चाहिए सरकार को बदलना, ना कि ये बेकार की मसाला फिल्में बनती रहें। हमारे आदमी को सबसे पहले इस लूट का सवाल उठाना चाहिए, बस फिर देखो कैसे हर कोई अपने पैरों पर खड़ा हो जाए।
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