इहे एग प्रमेय थे, जयुं कि साधारण a² + b² = c² वाली समीकरण अगर n > 2 होय त कभी सत्य नि होय। बड़ा-बड़ा विद्वान इकर उत्तर ढूंढण मि सैकड़ों बरस लगै दियां। मेरा टीचर कैंन कहे कि यूं लोगन की जिद्द और गणित मि नई सोच की कमी रै गयी।
पर मेरा लागण च कि असली कारण ऊंकी जिद्द नि रय, बल्कि ऊ लोगन की नज़र मि ये समस्या सैलाब जैसी रै गयी — छोटा सवाल पन नजर अंदाज कर दियां जांदा रया होलू, जैसा कि मैं आज क्लास मि घबराया और सिर्फ बड़ा सवाल पढ़ण की कोशिश मि छोटा फॉर्मूला भूल गयो।
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