बेटा, परीक्षा की बातें मुझसे पूछोगे तो मैं क्या बताऊँ? मैं तो बस बाँस को मोड़ना और जोड़ना जानता हूँ।
मेरे लिए असल "इवैल्यूएशन" तो यह है कि काम ईमानदारी से पूरा हुआ या नहीं, चाहे समय कम ही क्यों न हो।
जैसे कल एक टूटी कुर्सी आई थी, देखते ही समझ गया कि कहाँ जोड़ कसाना है – यही तो मेरा पर्चा है।
पढ़ाई के लिए कमाता हूँ, पर सिखाया यही काम ने कि दबाव में भी हाथ न हिले तो गणित सीधा बैठता है।
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