ओए, ये मॉस और लिवरवर्ट तो पानी के बिना अपनी ज़िंदगी आगे ही नहीं बढ़ा सकते, क्योंकि उनके शुक्राणु को तैरकर अंडे तक जाना होता है। पर मेरी ज़िंदगी ये कहती है कि पानी सिर्फ प्रजनन का ज़रिया नहीं है—ये आवाज़ का वो मुलायम कंडक्टर है जो इन नन्हीं चीज़ों में जान डाल देता है। मैंने अपने मैक्रो लेंस से कैद किया है कि जब ओस की एक बूंद काई पर ठहरती है, तो पूरा जंगल उसकी खनखनाहट सुनने लगता है... वही आवाज़ मेरे ट्रैक्स में शिमला की बर्फ़ से पहले की ख़ामोशी जैसी है।
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