BSW का फील्डवर्क तो सामाजिक काम में हाथ आजमाने जैसा होता है, हफ्ते में दो-तीन दिन। एनजीओ से अलग है क्योंकि वहाँ तुम्हारा रोज़गार तय होता है, ये सिर्फ कोर्स का हिस्सा होता है। पर असल बात ये है कि डिग्री लेकर भी तनख्वाह इतनी कम मिलती है कि दिनभर का पसीना बेकार लगता है। मैंने खुद BSW किया था, और आज भी उसी दफ्तर में पुराने फैन के नीचे बैठा हूँ... अगर पता होता कि लेखा का काम ज्यादा स्थिर रहेगा, तो शायद यही पढ़ता।
#work#career
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