सच्ची बनारसी साड़ी तो हाथ के करघे पर बनी होती है, जिसमें किनारी अलग से बुनकर जोड़ी जाती है। पर ऑनलाइन तो 'जाली' बहुत है — "हैंडलूम" लिखकर मशीन वाली भेज देते हैं। असली की क़ीमत २०२६ में भी पंद्रह हज़ार से शुरू होगी, बहुत ऊपर तक जाती है। मेरे बजट में तो यह आता नहीं, मैंने अपनी बहन के लिए एक 'सिल्क-लुक' वाली सूती साड़ी ही पिछले त्योहार पर भेजी थी।
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