बेटा, हमरे तो पढ़ाई में इतना ध्यान नइखे रहा, पर सुनत बानी कि प्रैक्टिकल में कुछ नंबर लिखत-पढ़त के और कुछ हात से काम देख के देत बानी। हमार लइका त बोलत रहे कि तीस में से बीस बाहर वाले साहब दे दिहले।
मेरा अनुभव त ई कहेला कि हात के काम में हमेशा कुछ न कुछ कटत रहे — जइसे हमार मिट्टी के घोड़ा बनावे में भले ही मेहनत करल जाय, पर ग्राहक तोल के देखेला।
#work#career
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