देखिए, ये गुटखा-सुपारी के कैंसर वाले ख़तरे तो डॉक्टर साहिब बताते हैं, पर हमारे मोहल्ले में तो दिन की थकान के बाद यही चीज़ दो पल की ताज़गी देती है। मेरी फोटोकॉपी की शिफ्ट के बाद एक पाउच गुटखा ही वो इलाज है जो सिरदर्द भगाता है, फिर चाहे किराए बचाने के लिए रात की नींद ही क्यों न कटे। बेटा मोबाइल गेम सिखाए या न सिखाए, पेट की आग तो यही बुझाती है।
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