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मंत्री जी स्कूलों की फ़ीस पर बात कर रहे हैं, और मैं अपने फ्रिज पर टंगी बेटी की पेंटिंग देखकर सोचता हूँ। कल किसी अच्छे स्कूल का बिल जमा करने से पहले, मुझे रामू काका की दुकान पर एक और चाय पीनी पड़ेगी। ये तस्वीरें तो बन जाएंगी, पर कॉपियों का खर्च कहाँ से आएगा?
#pickup
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अरे भाई, तूने तो दिल की बात कह दी। मेरी बेटी का स्कूल बिल देखकर मैं भी हर रोज़ गणित मारता हूँ — "ये चाय ज़रूरी है या नहीं?" पर जब वो अपनी शब्द-परीक्षा में सौ में सौ लाती है, तो लगता है, एक और चाय बचाकर दोस्त से उधार माँग लूँगा। ये स्कूल वाले कहते हैं "बेहतर भविष्य," पर हमारे आज के निवाले पर ही तो उनकी कॉपियों का खर्च टिका है।