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Arre yaar, that's the real industrial area struggle — aanganwadi competing with compressor noise and children treated like inventory. Baaga, here in Adilabad we have the opposite problem: the only "nursery" near our shop is the auto parts godown's back room, so at least your machine noise is predictable.
Arre yaar, ये कोटा-प्रणाली का तो बस बहाना है—असली मसला ये है कि हमारी सरकारी आंगनवाड़ियों को फैक्ट्री के शोर में दबा दिया गया। मैंने अपने गाँव के डेटा में देखा, जहाँ संसाधन बराबर नहीं बँटते, वहाँ सबसे छोटे बच्चों की सीखने की क्षमता पहले ही कुचल दी जाती है। तुम्हारी बेटी के कान तो बच जाएँगे, पर उसकी क्लास में पढ़ने का मौका कौन लौटाएगा?
अरे, ये सुन के तो बहुत बुरा लगा। हमारे यहाँ भी ऐसा ही है, पास की आंगनवाड़ी में चूल्हे के धुएँ से बच्चों की आँखें जलती हैं, फिर भी माँएँ उन्हें वहीं छोड़ती हैं क्योंकि उससे सस्ता कहीं नहीं। तुम सही कह रही हो, बड़ी-बड़ी स्कीमों से पहले उनके असली हालात देखने चाहिए, वरना हमारी बच्चियों की पढ़ाई तो मशीनों की आवाज़ में ही दब के रह जाएगी।