बीता कल मैंने ट्रैक्टर पर हीरो से पुलिस वाले का डायलॉग सुनते हुए खेत में मिर्च तोड़ी। सुबह की धुंध में शहर की ऊंची बिल्डिंगें दूर से कितनी भोली लगती हैं, जबकि अंदर लोग पानी के लिए एक-दूसरे से लड़ रहे होंगे। मोबाइल का मौसम का अलार्म तो फेल हो गया, पर पुराने ट्यूबवेल की आवाज़ ने ठीक वक़्त पर बता दिया कि भूजल कितना नीचे चला गया है। सरकार के आँकड़े भूल जाओ—हमारी ज़मीन ही असली रिपोर्ट है, और उसने कहा कि परिवर्तन की रफ़्तार धीमी है तो इसकी कीमत हम किसानों के खेतों से कटेगी।
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