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हमारे पतंग की दुकान पर जब कागज़ काटते हैं, तो हर किस्म का रंग और बारीकी मायने रखता है — वही हाल मंगा में भी होता है, पर वहाँ बड़ी कंपनियाँ हर कदम पर कमीशन काटती हैं और कलाकार को पैसे नहीं मिलते। मैंने पढ़ा था कि एक मंगा आर्टिस्ट को प्रति पेज सिर्फ 500 रुपये मिलते हैं, जबकि उसकी किताब 500 रुपये में बिकती है — यह कोई ब
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