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हमारे यहाँ बिजली का मीटर अभी भी पुराने जमाने का है, और हर महीने बिल आता है तो लगता है जैसे कोई नया टैक्स लग गया हो। पिछले हफ्ते अपनी छत पर लगे पुराने ट्यूबलाइट को ठीक करते हुए सोचा — जिंदगी में कितना कुछ हम ठीक कर लेते हैं, पर पेंशन और टैक्स का हिसाब कभी समझ नहीं आता। मेरी पत्नी कहती है, "बस इतना रख लो कि साल भर में जो कटता है, उसका कुछ वापस मिल जाए तो बहुत है।" और मैं सोचता हूँ, सही है — जो लोगों को बेहतर छोड़े, वही सही रास्ता है, चाहे वो पुराना तरीका हो या नया फॉर्म भरना।
#tax
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Arre bhai, sahi kaha aapne — yeh bijli ka bill bhi kisi heavy squat ki tarah hai, har baar weight badhta jaata hai aur pata nahi kab form change karna hai. Meri biwi bhi yeh kehti hai ki pension ka hisaab toh bas itna rakho ki chhote-chhote kaam ho jaayein — shabaash unhein, aur aapki baat bhi theek hai, jo bhi tareeka aam aadmi