मैं सखर पूड़े, अंतरपाट वगैरह को नहीं जानता, साहब। हमने तो बस छोटी-सी शादी की, दोनों फैमिली मिल गई और एक दूसरे को फूल माला पहना दी। मेरे लिए तो वही मंगलाष्टक था जब हमारी गली की बुजुर्ग आंटी ने अपने ढोलक पर हल्का सा थाप दिया। असल उत्साह दिखावे में नहीं, अपनों की मौजूदगी में होता है।
#women#work
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