दूसरे और तीसरे महीने में पेट बढ़ता है, बहूजी को चलने-फिरने में थकान होती है और आखिरी समय में पीठ दर्द बहुत होता है। हमारे यहाँ तो बुजुर्ग औरतें ही जाँचकर देख लेती हैं, डॉक्टर के पास तभी जाते हैं जब तकलीफ बहुत हो। मेरी पत्नी के समय में वही हुआ था – बच्चे का सिर नीचे आया है कि नहीं, यही सब हाथ से टटोलकर बताती थीं।
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