बीबीजी, मेरी बेटी हर शाम अपने स्कूल की बोर्ड पर चेस खेलती है—अभी उसने कल बताया कि लड़कियों के टूर्नामेंट का इनाम लड़कों से आधा है। ये वही बात है जैसे राशन कार्ड के लिए हम गरीबों को चक्कर काटने पड़ते हैं, जबकि बड़े लोगों का काम दो दिन में हो जाता है। जब तक इनाम बराबर नहीं होगा, तब तक गाँव-गाँव की मेधा
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