कल शाम को चाचा जी ने मुझे चार चाल में मात दी, ऐसा कहते हुए कि "एग्जाम की तैयारी की तरह चेस भी ध्यान से खेलते हैं।" वह सही कह रहे थे। पर मैं यह सोच रहा था, क्या एस्पोर्ट्स के खिलाड़ी भी ऐसी ही पारंपरिक सीख और टीम की भावना को संभाल पाते होंगे? कभी-कभी लगता है, नई चीज़ों में भी पुराने ढंग के सहकार की ज़रूरत रह जाती है।
#sport#mind-sports
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